ग्वालियर का नया आईएसबीटी बना सफेद हाथी? करोड़ों की परियोजना के बाद भी बसों का इंतजार

ग्वालियर का नया आईएसबीटी बना सफेद हाथी? करोड़ों की परियोजना के बाद भी बसों का इंतजार

ग्वालियर – ग्वालियर में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) एक बार फिर चर्चा में है। यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं और शहर को ट्रैफिक जाम से राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया यह बस टर्मिनल अब तक अपनी पूरी उपयोगिता साबित नहीं कर पाया है। हालात यह हैं कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस भवन तैयार होने के बावजूद बड़ी संख्या में बसों का संचालन अब भी पुराने बस स्टैंडों से ही हो रहा है।
करीब 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस आईएसबीटी में एक साथ 130 से अधिक बसों के खड़े होने की क्षमता, प्रतीक्षालय, फूड जोन, रेस्टोरेंट, पार्किंग, मेडिकल सेंटर और अन्य यात्री सुविधाएं विकसित की गई हैं। परियोजना को शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना गया था।
इसके बावजूद बसों की शिफ्टिंग और संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। कई रूटों की बसें अभी भी शहर के भीतर पुराने बस स्टैंडों और सड़कों से संचालित हो रही हैं, जिससे जाम और अव्यवस्था की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आधुनिक बस टर्मिनल तैयार हो चुका है तो उसका पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
परियोजना को लेकर निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़े सवाल भी समय-समय पर उठते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में उद्घाटन के बाद भी सुविधाओं के अपेक्षित उपयोग नहीं होने और रखरखाव संबंधी कमियों का उल्लेख किया गया है।
अब नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि प्रशासन जल्द स्पष्ट रोडमैप बनाकर सभी प्रमुख बस सेवाओं को नए आईएसबीटी से संचालित करे, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह परियोजना अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सके और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें

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