अयोध्या – अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों के बीच द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के बेहतर प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर “सनातन बोर्ड” के गठन की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के संचालन और आर्थिक पारदर्शिता के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
शंकराचार्य का कहना है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उनका मानना है कि यदि एक केंद्रीकृत और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाए तो इस प्रकार के विवादों और आरोपों से बचा जा सकता है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में पहले से ही विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच कर रही है। आरोप है कि चढ़ावे की रकम में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां संबंधित कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ कर रही हैं। वहीं, ट्रस्ट ने भी मामले की निष्पक्ष जांच का समर्थन किया है।
स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। ऐसे में उनके प्रबंधन को लेकर स्पष्ट नियम और जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उनका मानना है कि प्रस्तावित सनातन बोर्ड मंदिरों की संपत्तियों, दान राशि और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच शंकराचार्य की यह मांग अब धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर विभिन्न धार्मिक संगठनों और संत समाज की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती की मांग, सनातन बोर्ड गठन की उठाई आवाज